अध्याय 10: विभूति योग
श्लोक 10:15

अर्थ

अर्जुन बोले

हे पुरुषोत्तम ! हे भूतभावन ! हे भूतेश ! हे देवों के देव! हे जगत के स्वामी ! आप स्वयं ही अपने-आप को जानते हैं!

संस्कृत श्लोक

अर्जुन उवाच

स्वयमेवात्मनात्मानं वेत्थ त्वं पुरुषोत्तम ।

भूतभावन भूतेश देवदेव जगत्पते ॥ १०:१५ ॥

पदच्छेद

स्वयम् एव आत्मना आत्मानम् वेत्थ, त्वम् पुरुष-उत्तम—

भूत-भावन, भूत-ईश, देव-देव, जगत्-पते!

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