अध्याय 12: भक्ति योग
श्लोक 12:2

अर्थ

भगवान श्री कृष्ण बोले

जिनका मन मुझसे भावाविष्ट हो, जो निरंतर मेरे भजन-ध्यान में लगकर मुझसे जुड़े रहते हों, जो परम श्रद्धा-भावना से युक्त होकर मुझ {सगुण-रूप} परमेश्वर को भजते हैं, वे मुझको योगियों में अति उत्तम योगी मान्य हैं।

संस्कृत श्लोक

श्रीभगवान् उवाच

मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते ।

श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः ॥ १२:२ ॥

पदच्छेद

मयि आवेश्य मनः ये माम् नित्य-युक्ताः उपासते,

श्रद्धया परया उपेताः, ते मे युक्त-तमाः मताः।।

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