अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग
श्लोक 13:17
अर्थ
भगवान श्री कृष्ण बोले
वह परब्रह्म ज्योतियों के भी ज्योति, तमस (अंधकार या माया) से अत्यंत परे कहे जाते हैं, वह परमात्मा ज्ञान-स्वरूप हैं, जानने-योग्य हैं, एवं जाने जा सकते हैं, और {विशेष रूप से} सबके हृदय (अंतःकरण) में स्थित हैं।
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवान् उवाच
ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते ।
ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम् ॥ १३:१७ ॥
पदच्छेद
ज्योतिषाम् अपि तत् ज्योतिः तमसः-परम उच्यते।
ज्ञानम्, ज्ञेयम्, ज्ञान-गम्यम्, हृदि सर्वस्य विष्ठितम् ।।
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