अध्याय 14: गुण त्रय विभाग योग
श्लोक 14:14
अर्थ
भगवान श्री कृष्ण बोले
जब यह जीव सत्त्वगुण की वृद्धि में मृत्यु को प्राप्त होता है, तब उत्तम कर्म करने वालों के निर्मल लोकों को जाता है।
टीका
भागवतपुराण लिखता है—जो निष्काम कर्म करने वाले हैं, उन्हें 'मह:', 'तप:', 'जन:' और 'सत्यलोक' कहे जाने वाले ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। (श्लोक 8–9, अध्याय 10, तृतीय स्कंध, भागवतपुराण) भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक के ऊपर महर्लोक है। उससे भी ऊपर जन, तप और सत्यलोक हैं। (श्लोक 18–19, अध्याय 6, द्वितीय स्कंध, भागवतपुराण)
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवान् उवाच
यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् ।
तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ॥ १४:१४ ॥
पदच्छेद
यदा सत्त्वे प्र-वृद्धे तु प्र-लयम् याति देह-भृत्,
तदा उत्तम-विदाम् लोकान् अ-मलान् प्रति-पद्यते।
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