अध्याय 18: मोक्ष सन्न्यास योग
श्लोक 18:11
अर्थ
भगवान श्री कृष्ण बोले
किसी भी शरीरधारी मनुष्य द्वारा सभी कर्मों का त्याग संभव नहीं है, इसलिए जो कर्म-फल {की इच्छा} का त्यागी है, वही त्यागी है, ऐसा कहते हैं।
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवान् उवाच
न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः ।
यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ॥ १८:११ ॥
पदच्छेद
न हि देह-भृता शक्यम् त्यक्तुम् कर्माणि अशेषतः;
यः तु कर्म-फल-त्यागी— सः 'त्यागी' इति अभि-धीयते।
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