अर्थ
मनुष्य शरीर, वाणी और मन से उचित अथवा अनुचित जो कुछ भी कर्म करता है—उस {की सफलता} के ये पाँचों कारण हैं।
टीका
'अधिष्ठान' का अर्थ होता है 'आधार', 'आसन' या 'आश्रय'। कार्य की सफलता में एक उदाहरण से 'अधिष्ठान' की भूमिका समझें। एक ही उम्मीदवार अगर चुनाव में स्वतंत्र खड़ा होता है या किसी लोकप्रिय राजनीतिक दल से खड़ा होता है, तो चुनाव में उसकी सफलता की संभावना में काफी फर्क पड़ जाता है, क्योंकि चुनाव में 'अधिष्ठान' या 'आधार' अथवा 'आश्रय' (इस संदर्भ में राजनीतिक दल) की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। ऐसे ही, आध्यात्मिक क्षेत्र में मुक्ति के लिए किस देवता को आप अपना 'अधिष्ठान' या 'आश्रय' बनाते हैं, या किस आध्यात्मिक मार्गदर्शक को आप अपना 'आधार' या 'अधिष्ठान' बनाते हैं — इस पर भी आपकी आध्यात्मिक सफलता या सिद्धि की गति बहुत-कुछ निर्भर करेगी।
संस्कृत श्लोक
शरीरवाङ्मनोभिर्यत्कर्म प्रारभते नरः ।
न्याय्यं वा विपरीतं वा पञ्चैते तस्य हेतवः ॥ १८:१५ ॥
पदच्छेद
शरीर-वाक्-मनोभिः यत् कर्म प्रारभते नरः,
न्याय्यम् वा विपरीतम् वा— पञ्च एते तस्य हेतवः।