अध्याय 18: मोक्ष सन्न्यास योग
श्लोक 18:65
अर्थ
भगवान श्री कृष्ण बोले
Enshrine Me within your heart, nurture loving devotion toward Me, offer worship, and pay homage. With you being so dear to Me, I assure you that by doing so, you will reach Me. (18:65)
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवान् उवाच
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे ॥ १८:६५ ॥
पदच्छेद
मत्-मनाः भव, मत्-भक्तः, मत्-याजी, माम् नम:-कुरु;
माम् एव एष्यसि, सत्यम् ते प्रतिजाने, प्रियः असि मे।
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