अध्याय 2: सांख्य योग
श्लोक 2:36
अर्थ
भगवान श्री कृष्ण बोले
तुम्हारा अहित चाहने वाले लोग तुम्हारे सामर्थ्य की निंदा करते हुए तुम्हें बहुत-से न-कहने-योग्य वचन भी कहेंगे। इससे अधिक दुःखद और क्या होगा?
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवान् उवाच
अवाच्यवादांश्च बहून्वदिष्यन्ति तवाहिताः ।
निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम् ॥ २:३६ ॥
पदच्छेद
अवाच्य-वादान् च बहून् वदिष्यन्ति, तव अ-हिताः!
निन्दन्तः तव सामर्थ्यम्, ततः दुःख-तरम् नु किम्?
83 में से 700
? ? दबाएं शॉर्टकट के लिएCtrl+K त्वरित जंपB साइडबार