अध्याय 3: कर्म योग
श्लोक 3:28
अर्थ
भगवान श्री कृष्ण बोले
But O, Mighty-armed! One who recognizes that all events stem from Nature's three primary forces (Gunas) sees life's events as a dance of these elements. By seeing things this way, one doesn't get overly attached to worldly matters. (3:28)
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवान् उवाच
सारे कर्म सब प्रकार से प्रकृति के तीन गुणों— सत्त्वगुण, रजोगुण, तमोगुण—द्वारा {शरीर और मन के माध्यम से} किए जाते हैं ।
तो भी, जिसका अंतःकरण अहं-भाव से मोहित हो रहा है, वह अज्ञानी ‘मैं कर्ता हूँ’, ऐसा मानता है। ॥ ३:२८ ॥
पदच्छेद
तत्त्व-वित् तु महा-बाहो गुण-कर्म-वि-भागयोः।
गुणाः गुणेषु वर्तन्ते इति मत्वा न सज्जते।।
147 में से 700
? ? दबाएं शॉर्टकट के लिएCtrl+K त्वरित जंपB साइडबार