अध्याय 6: ध्यान योग
श्लोक 6:40

अर्थ

भगवान श्री कृष्ण बोले

हे अर्जुन! उस योगी का न तो इस लोक में विनाश होता है, न परलोक में ही। निश्चय ही, हे प्यारे, कल्याणकारी कार्यों में लगा हुआ कोई भी मनुष्य दुर्गति को प्राप्त नहीं होता!

संस्कृत श्लोक

श्रीभगवान् उवाच

पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते ।

न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥ ६:४० ॥

पदच्छेद

पार्थ न एव इह, न अ-मुत्र, वि-नाशः तस्य विद्यते;

न हि कल्याण-कृत् कश्चित् दुर्गतिम् तात गच्छति।

273 में से 700