अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग
श्लोक 9:16

अर्थ

भगवान श्री कृष्ण बोले

वैदिक यज्ञ-बलि मैं हूँ, वैदिक यज्ञ मैं हूँ, स्वधा अर्थात यज्ञ में अर्पण किया जाने वाला अन्न मैं हूँ, वनस्पति से उत्पन्न औषधि मैं हूँ, {यज्ञ में हवन करते समय पढ़े जाने वाले} मंत्र मैं हूँ, {हवन में छोड़े जाने वाला} घृत मैं हूँ, {हवन की} अग्नि मैं हूँ, और अग्नि में छोड़ी हुई आहुति भी मैं ही हूँ।

संस्कृत श्लोक

श्रीभगवान् उवाच

अहं क्रतुरहं यज्ञः स्वधाहमहमौषधम् ।

मन्त्रोऽहमहमेवाज्यमहमग्निरहं हुतम् ॥ ९:१६ ॥

पदच्छेद

अहम् क्रतुः, अहम् यज्ञः, स्वधा अहम्, अहम् औषधम्,

मन्त्रः अहम्, अहम् एव आज्यम्, अहम् अग्निः, अहम् हुतम्।

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